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श्री दावड़ा विश्वविद्यालय में मधुबंती बागची ने बांधा समां, दो दिवसीय वार्षिक उत्सव का भव्य समापन

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श्री दावड़ा विश्वविद्यालय परिसर में दिनांक 13 एवं 14 दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय रात्रिकालीन वार्षिक उत्सव का भव्य, सुव्यवस्थित एवं सफल समापन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण के साथ-साथ सांस्कृतिक समृद्धि एवं विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभा को प्रभावशाली रूप से प्रस्तुत किया।

उत्सव के प्रथम दिवस (13 दिसंबर) को आयोजित म्यूज़िक कॉन्सर्ट में प्रसिद्ध गायिका मधुबंती बागची ने अपनी सशक्त एवं ऊर्जावान प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। “आज की रात”, “फीलिंग” जैसे लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने संपूर्ण परिसर को संगीतमय वातावरण से भर दिया और दर्शकों में उत्साह का संचार किया।

द्वितीय दिवस (14 दिसंबर) को आयोजित रात्रिकालीन वार्षिकोत्सव में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य, संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस अवसर पर महाभारत के द्रौपदी चीरहरण का जीवंत मंचन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। साथ ही विद्यार्थियों द्वारा गीत एवं नृत्य के माध्यम से विश्वविद्यालय में संचालित विभिन्न शैक्षणिक विषयों की रचनात्मक प्रस्तुति की गई, जिसे दर्शकों एवं अभिभावकों ने खूब सराहा।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के Chief Executive Officer श्री चिन्मय दावड़ा ने कहा कि “यहाँ उपस्थित विद्यार्थी देश का भविष्य हैं। वार्षिक उत्सव जैसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं, जो उनमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता एवं टीमवर्क की भावना विकसित करते हैं। श्री दावड़ा विश्वविद्यालय शिक्षा के साथ-साथ संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के मूल्यों के विकास हेतु निरंतर प्रतिबद्ध है।”

वहीं विश्वविद्यालय की महानिदेशक डॉ. चार्मी दावड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि “विद्यार्थियों की प्रतिभा ही किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान होती है। इस दो दिवसीय आयोजन में छात्रों ने अनुशासन, समर्पण एवं सृजनशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।”

इस भव्य आयोजन की सफलता में विश्वविद्यालय के कुलसचिव श्री कुमार श्वेताभ, मुख्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. वरुण गंजीर, समस्त शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक स्टाफ तथा छात्र-छात्राओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी के समन्वित प्रयासों से यह दो दिवसीय वार्षिक उत्सव अत्यंत सफल, अनुशासित एवं स्मरणीय सिद्ध हुआ।

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