स्वास्थ्य और नागरिक सेवाओं में एआई के प्रभावी उदाहरण
केआरएआई डायग्नोस्टिक्स ने छाती के एक्स-रे से एआई के माध्यम से टीबी स्क्रीनिंग की प्रक्रिया विकसित की है। उदाहरण प्रस्तुत किया। इंडिया एआई के सहयोग से यह तकनीक 105 से अधिक देशों में लागू हो चुकी है और इसे एफडीए की स्वीकृति भी प्राप्त है। कंवर्ज इन (नोकोबा) सरकारी कॉल सेंटर्स और शिकायत निवारण प्रणालियों में एआई एजेंट्स के उपयोग पर काम कर रहा है। व्हाट्सएप आधारित संवाद प्रणाली, शत-प्रतिशत कॉल ऑडिटिंग और एसओपी अनुपालन से परिचालन लागत घटी है और नागरिक संतुष्टि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
एआई प्रतिभा निर्माण पर विशेष जोर
इंडिया एआई मिशन के ‘एआई फॉर ऑल’ कार्यक्रम के अंतर्गत उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम, फेलोशिप्स और देशभर में 570 एआई एवं डेटा लैब्स स्थापित की जा रही हैं। यूजी, पीजी और पीएचडी विद्यार्थियों को स्टाइपेंड, मेंटरशिप और कंप्यूटर एक्सेस उपलब्ध कराया जा रहा है।
शासन में जीआईएस और एआई का एकीकृत उपयोग
‘जिला जीआईएस प्लानिंग सिस्टम’ के माध्यम से जमीनी स्तर पर योजना और निगरानी को सशक्त किया जा रहा है। एआई, जीआईएस, ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी के एकीकृत उपयोग से शहरी नियोजन, जल प्रबंधन और खनन निगरानी में पारदर्शिता लाई जा रही है।
भारत प्रारंभिक डिजिटलीकरण से आगे बढ़कर अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण में उल्लेखनीय प्रगति कर चुका है। आधार, यूपीआई, कोविन, डिजिलॉकर, भाषिणी और ओएनडीसी इस परिवर्तन की मजबूत आधारशिला बन गये हैं।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एआई के एकीकरण से स्वास्थ्य जांच, बहुभाषी सेवा वितरण और निर्णय समर्थन प्रणालियों में शासन की दक्षता कई गुना बढ़ाई जा सकती है। भाषाई समावेशन डिजिटल समानता का आधार है। नेतृत्व-आधारित परिवर्तन और क्षमता निर्माण एकीकृत बैक-एंड प्लेटफॉर्म्स के लिये आवश्यक हैं।
आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई
एआई उत्पादकता वृद्धि, रोजगार सृजन, नवाचार और समावेशी विकास का सशक्त माध्यम बन गई है। एआई को केवल तकनीकी समाधान नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित और सामाजिक प्रभाव आधारित दृष्टिकोण के साथ अपनाये जाने की आवश्यकता है।
कृषि में एआई आधारित मृदा परीक्षण और सलाह प्रणालियों को किसानों की निर्णय प्रक्रिया को सरल बनाने वाला तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स रोग पहचान में तेजी लाने वाला प्रभावी उपकरण बन गया है। एमएसएमई और टियर-2 व टियर-3 क्षेत्रों में एआई विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल अवसंरचना, साझा डेटा प्लेटफॉर्म और उपयुक्त संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है।
सुरक्षित, लचीली और भविष्य के लिये तैयार डिजिटल एवं एआई अवसंरचना के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई अब आकांक्षात्मक तकनीक नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा वितरण, औद्योगिक प्रतिस्पर्धा और डिजिटल शासन की मूल आवश्यकता बन चुकी है।
एआई अवसंरचना है भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी
सॉवरेन डेटा और कंप्यूटर अवसंरचना के रणनीतिक महत्व की दृष्टि से उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, स्वदेशी हार्डवेयर, सुरक्षित डेटा सेंटर और मजबूत सप्लाई चेन को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विकसित करने की आवश्यकता है। गोपनीयता, अनुपालन, जवाबदेही और जोखिम प्रबंधन को एआई के पूरे जीवनचक्र में अंतर्निहित किया जाना चाहिए। भरोसेमंद और सुरक्षित एआई अवसंरचना भारत के दीर्घकालिक डिजिटल नेतृत्व की कुंजी है।