राजिम छत्तीसगढ़ की प्रयाग नगरी जहां महानदी पैरी नदी सोडुर नदियों का त्रिवेणी संगम हैं l इस त्रिवेणी की तुलना यूपी के प्रयाग राज से किया जाता है लोग अगर अस्थि विसर्जन, और भी अन्य धार्मिक कार्य के लिए यूपी के प्रयाग राज जाते हैं राजिम में भारी संख्या में लोग अस्थि विसर्जन, अनेक धार्मिक कार्य के लिए आते हैं राजिम में भी किए गए इन कार्यों का यूपी के प्रयाग राज का एक जैसा लाभ मिलता है l मगर इन दिनों महानदी का पानी इतना दूषित हो चुका है की लोग आचमन करना तो छोड़ दे मुंह में जल लेना भी पसंद नहीं कर रहे हैं वहीं आपको बता दें की नदिया मड़ाई के लिए एनीकेट का गेट खोल दिया गया है जिससे नदी पूरी तरह एक मैदान जैसा दिखाई देने लगी हैं साथ ही पानी के कम होने पर नदी में जमा गाद का बदबू लोगों के लिए असहनीय हो गया है वहीं आपको बता दें कि महानदी में जमा गाद पूरी तरह से मैदान बन चुका है जिससे नगर एवं आस पास का वाटर लेवल भी दिन ब दिन घटता जा रहा है l
पूर्व के समय में महानदी का पानी बहुत ही स्वच्छ एवं निर्मल होता था जिसमें आप अगर सिक्का भी नदी में डाल देते तो वह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था किन्तु आज के समय में महानदी का पानी बहुत ही ज्यादा खराब व पानी का रंग मट मैला दूषित होने से लोग नदी में नहाने से चर्म रोग सम्बन्धी बिमारी देखने को मिल रहा है l एक महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत सरकार की एक पर्यावरण प्रकृति के क्षेत्र मे कार्य करने वाली संस्था एनजीटी राष्ट्रिय हरित प्राधिकरण के द्वारा एक रिपोर्ट भी जारी किया गया था की महानदी छत्तीसगढ़ की सबसे दूषित नदियों में से हैं इतनी बड़ी समस्या का होने के बाद भी ना तो केन्द्र सरकार और राज्य सरकार इस विषय को गंभीर से ना लेना आने वाले भविष्य के लिए ख़तरा बन सकता है।