भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्राकृतिक रूप से बाघों की बढ़ती मौजूदगी के कारण खिवनी वन्य-प्राणी अभयारण्य वन्यजीव संरक्षण की सफलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का विजन खिवनी को एक सुदृढ़ बाघ आवास के साथ-साथ प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल के रूप में विकसित करना है, जिससे संरक्षण और पर्यटन दोनों को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि खिवनी आने वाले समय में वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म का आदर्श केंद्र बनेगा।

मालवा-निमाड़ क्षेत्र के शुष्क पर्णपाती वनों में स्थित लगभग 134.7 वर्ग किलोमीटर में फैला खिवनी अभयारण्य, जो पहले केवल रातापानी जैसे बड़े वनों को जोड़ने वाला ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’ माना जाता था, आज बाघों के सुरक्षित प्रजनन स्थल के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस परिवर्तन को राज्य की सुनियोजित नीतियों और सतत संरक्षण प्रयासों का परिणाम बताया।
खिवनी में बाघ ‘युवराज’ और ‘मीरा’ ने इसे अपना स्थायी ठिकाना बनाकर नई पहचान दी है। वन विभाग द्वारा मीरा के तीन शावकों को जन्म देने की पुष्टि की गई है। ये शावक अब अपनी मां के साथ जंगल में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वर्तमान में खिवनी में लगभग एक दर्जन बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जो इस क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्जीवन का स्पष्ट संकेत है।







