Home छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में डिजिटल एवं फाइनेंशियल लिटरेसी पर कार्यशाला संपन्न

छत्तीसगढ़ महाविद्यालय में डिजिटल एवं फाइनेंशियल लिटरेसी पर कार्यशाला संपन्न

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दैनिक जीवन में डिजिटल भुगतान, वित्तीय जागरूकता, साइबर सुरक्षा तथा प्रभावी वित्तीय प्रबंधन के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ शासकीय महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन आईक्यूएसी सेल के तत्वावधान में नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन (NCFE) द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का प्रथम सत्र छात्र-छात्राओं हेतु आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य वक्ता श्री आदित्य बैस (District Head, नेशनल सेंटर फॉर फाइनेंशियल एजुकेशन) का स्वागत महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर द्वारा किया गया। साथ ही प्राचार्य महोदया का स्वागत आईक्यूएसी की संयोजक डॉ. मंजू वर्मा द्वारा किया गया।

आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. मंजू वर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज के समय में डिजिटल एवं वित्तीय साक्षरता केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिम्मेदार डिजिटल उपयोग तथा सुरक्षित वित्तीय व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।

प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में प्रत्येक विद्यार्थी को वित्तीय रूप से जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर सुरक्षा की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को बचत की आदत विकसित करने, सोच-समझकर निवेश करने तथा वित्तीय निर्णय लेते समय सतर्क रहने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करती हैं, जो उनके भविष्य को सुरक्षित और सशक्त बनाने में सहायक होती हैं।

मुख्य वक्ता श्री आदित्य बैस ने अपने विस्तृत व्याख्यान में विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षरता के विभिन्न आयामों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि NCFE का उद्देश्य लोगों में वित्तीय ज्ञान, व्यवहार एवं दृष्टिकोण का विकास करना है। उन्होंने Money Management Skills, Budgeting, Saving एवं Investment के महत्व को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
उन्होंने विद्यार्थियों को वित्तीय स्वायत्तता का अर्थ बताते हुए कहा कि सही वित्तीय निर्णय व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाते हैं। उन्होंने Investor और Spender के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए दीर्घकालिक निवेश की आदत अपनाने पर बल दिया।
इसके साथ ही उन्होंने Financial Knowledge, Financial Behaviour एवं Financial Attitude को वित्तीय साक्षरता के तीन प्रमुख स्तंभ बताते हुए इनके संतुलन पर जोर दिया।

इसके पश्चात द्वितीय सत्र प्राध्यापक एवं कर्मचारियों हेतु आयोजित किया गया, जिसमें श्री आदित्य बैस ने NCFE संस्था का विस्तृत परिचय देते हुए उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने Income, Expense, Budgeting तथा Saving की अवधारणाओं को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझाया। साथ ही Active Income एवं Passive Income के बीच अंतर, Gold ETF, Silver ETF तथा Mutual Fund के Regular Plan एवं Direct Plan के विषय में भी उपयोगी जानकारी प्रदान की।

कार्यक्रम का संचालन वाणिज्य विभाग की प्राध्यापक डॉ. रेनू कुमार यादव द्वारा किया गया तथा लोक प्रशासन विभाग के प्राध्यापक डॉ. सुनील तिवारी ने आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता कर लाभ प्राप्त किया।

यह कार्यशाला महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजलि भटनागर के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।

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