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शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर में गिरावट, ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक और तृतीयक क्षेत्र के रोजगार में वृद्धि

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दिल्ली। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) द्वारा संचालित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) जनसंख्या की गतिविधि में भागीदारी और रोजगार-बेरोजगारी की स्थिति पर आंकड़ों का प्राथमिक स्रोत है। जनवरी 2025 से पीएलएफएस सर्वेक्षण पद्धति को संशोधित किया गया है ताकि सीडब्ल्यूएस ढांचे के तहत ग्रामीण और शहरी भारत दोनों के लिए श्रम बल संकेतकों के मासिक और त्रैमासिक अनुमान प्रदान किए जा सकें।

व्यापक कवरेज के साथ उच्च आवृत्ति वाले श्रम बल संकेतक उत्पन्न करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) की नमूना पद्धति को जनवरी 2025 से संशोधित किया गया। पुनर्रचित पीएलएफएस का उद्देश्य निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त करना है:

अखिल भारतीय स्तर पर वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए हर महीने रोजगार और श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर) तथा बेरोजगारी दर (यूआर) जैसे बेरोजगारी के प्रमुख संकेतक उत्पन्न करना।
त्रैमासिक पीएलएफएस परिणामों को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करना ताकि सीडब्ल्यूएस ढांचे के तहत ग्रामीण और शहरी भारत दोनों के लिए श्रम बाजार संकेतकों के त्रैमासिक अनुमान तैयार किए जा सकें।
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए सामान्य स्थिति (पीएस+एसएस) और वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) दोनों में प्रमुख रोजगार और बेरोजगारी संकेतकों के वार्षिक अनुमान प्रदान करना।
इससे पहले, दिसंबर 2024 तक जारी किए गए पीएलएफएस त्रैमासिक बुलेटिनों में केवल शहरी क्षेत्रों के श्रम बाजार संकेतक प्रस्तुत किए गए थे। अप्रैल-जून 2025 का बुलेटिन इस श्रृंखला का पहला बुलेटिन था जिसमें ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए अनुमान प्रदान किए गए थे और जनवरी-मार्च 2026 का वर्तमान बुलेटिन इस श्रृंखला का चौथा बुलेटिन है। इस त्रैमासिक बुलेटिन में, श्रमिकों की संख्या का पूर्ण रूप से अनुमान प्रदान करने का प्रयास किया गया है ।

यह त्रैमासिक बुलेटिन अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए अलग-अलग वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (सीडब्ल्यूएस) में प्रमुख श्रम बल संकेतकों – श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), बेरोजगारी दर (यूआर), और व्यापक रोजगार स्थिति तथा कार्य उद्योग के अनुसार श्रमिकों के वितरण के अनुमान प्रस्तुत करता है। इसके अतिरिक्त, चयनित राज्यों के लिए सीडब्ल्यूएस में एलएफपीआर, डब्ल्यूपीआर और यूआर के राज्य-स्तरीय अनुमान भी प्रदान किए जाते हैं।

सीडब्ल्यूएस के तहत 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए प्रमुख निष्कर्ष:

श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) स्थिर रही: जनवरी-मार्च 2026 में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की कुल एलएफपीआर 55.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि पिछली तिमाही में यह 55.8 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की एलएफपीआर वर्तमान तिमाही में 58.2 प्रतिशत रही, जबकि अक्टूबर-दिसंबर 2025 में यह 58.4 प्रतिशत थी। शहरी क्षेत्रों में इसी आयु वर्ग की एलएफपीआर जनवरी-मार्च 2026 में 50.2 प्रतिशत रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 50.4 प्रतिशत थी।

महिला श्रम बल सहभागिता दर (एलएफपीआर) में व्यापक रूप से कोई बदलाव नहीं हुआ: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं का समग्र एलएफपीआर लगभग स्थिर रहा, जो जनवरी-मार्च 2026 में 34.7 प्रतिशत दर्ज किया गया, जबकि पिछली तिमाही में यह 34.9 प्रतिशत था। वर्तमान तिमाही में, ग्रामीण क्षेत्रों में महिला एलएफपीआर 39.2 प्रतिशत अनुमानित किया गया, जबकि पिछली तिमाही में यह 39.4 प्रतिशत था। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 25.4 प्रतिशत रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 25.5 प्रतिशत था।

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