
दिल्ली। भारतीय परिवार आज भी किसी भी पड़ोसी देश के परिवार की तुलना में रसोई गैस(एलपीजी) कहीं सस्ती कीमत पर खरीद रहे हैं, और यह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की कीमतों से काफी कम है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना(पीएमयूवाई) के एक लाभार्थी को 14.2-किलोग्राम के एक सिलेंडर के लिए प्रभावी रूप से ₹642 का भुगतान करना पड़ता है, जबकि दिल्ली में एक सामान्य उपभोक्ता ₹942 का चुकाता है। इसके विपरीत, वहीं, एक सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़कर अब ₹1,600 से अधिक हो गई है।

भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से जुड़ी हुई हैं। हालांकि, सरकार घरेलू एलपीजी के लिए उपभोक्ता को मिलने वाली प्रभावी कीमत को नियंत्रित करना जारी रखे हुए है। कोई भी परिवार जितनी चाहे उतनी संख्या में सिलेंडर ₹942 की दर पर खरीद सकता है। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना(पीएमयूवाई) के लाभार्थी को, हरेक वर्ष पहले चार रिफिल पर ₹300 प्रति सिलेंडर का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण(डीबीटी) मिलेगा— जो कि एक सामान्य उज्ज्वला परिवार की औसत वार्षिक खपत(लगभग चार रिफिल प्रति वर्ष) के बराबर है — और इस तरह वे उन रिफिल के लिए प्रभावी रूप से ₹642 का भुगतान करते हैं; यह सहायता अपरिवर्तित है। यहां तक कि एक गैर-पीएमयूवाई परिवार भी सिलेंडर की बाजार की लागत से लगभग ₹700 कम का भुगतान करता है। वितरण लागत के कारण खुदरा कीमतें अलग-अलग स्थानों पर थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।
हरेक गैस सिलेंडर पर जो कई सौ रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, उसका भार आम परिवारों पर नहीं डाला गया है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सरकार ने इस लागत को खुद वहन किया है, ताकि उपभोक्ताओं को अधिक कीमत न चुकानी पड़े।







