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भारत के युवा ही ‘विकसित भारत 2047’ की मुख्य ताकत होंगे : धर्मेंद्र प्रधान

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में ‘युवा संगम चरण VI’ कार्यक्रम के तहत छत्तीसगढ़ से आए छात्र प्रतिनिधियों से बातचीत की।

इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि ‘युवा संगम’ ने युवाओं को पाठ्यपुस्तकों और कक्षाओं से परे भारत को जानने-समझने और देश की सांस्कृतिक विविधता, विकास की पहलों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं की गहरी समझ हासिल करने का अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों के युवाओं के बीच आपसी बातचीत से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत हुई है।

मंत्री ने छात्रों को नवाचार, उद्यमशीलता, सामुदायिक भागीदारी और सामाजिक जिम्मेदारी के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने भारत के विकास में युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला और उनसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 के तहत बनाए गए अवसरों का लाभ उठाने का आग्रह किया।

प्रधान ने नज़रिए को व्यापक बनाने और आपसी समझ को बढ़ावा देने में अनुभव से सीखने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने प्रतिनिधियों को कार्यक्रम से मिली सीख को अमल में लाने और समाज तथा राष्ट्र-निर्माण में सकारात्मक योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।

छत्तीसगढ़ से आए छात्र प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने युवा सोच को आकार देने में अनुभव के आधार पर सीखने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि ‘युवा संगम’ जैसी यात्राओं से प्रतिभागियों में अनुकूलन क्षमता, टीम वर्क और जीवन के लिए ज़रूरी अन्य कौशल विकसित करने में मदद मिलती है, जो औपचारिक शिक्षा से बेहतर होता है।

डॉ. जोशी ने प्रतिनिधियों से इस यात्रा का पूरा लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने और इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मज़बूत होती है और भारत की समृद्ध विविधता के प्रति समझ और सम्मान बढ़ता है। उन्होंने प्रतिभागियों से यह भी कहा कि वे इस कार्यक्रम की भावना को आगे बढ़ाएं—इसके लिए वे जो सीखें हैं उसे आपस में साझा करें। मंत्री महोदय ने इस यात्रा के दौरान बनी मित्रता को बनाए रखने और एक जुड़े हुए, आत्मविश्वासी व वैश्विक रूप से जागरूक भारत के निर्माण में योगदान देकर इस कार्यक्रम की भावना को आगे बढ़ाने का भी आह्वान किया।

छात्र प्रतिनिधियों ने दिल्ली यात्रा के अपने अनुभव और विचार साझा किए और एक दिलचस्प सत्र के दौरान मंत्री महोदय से बातचीत की।

कार्यक्रम के दौरान ‘युवा संगम फ़ेज़ 6’ पर एक छोटा वीडियो दिखाया गया, जिसमें प्रतिनिधियों की यात्रा, उनके अनुभवों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की झलक दिखाई गई। छात्रों ने अलग-अलग संस्कृतियों से जुड़ने और ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मज़बूत करने का मौका देने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्रालय का आभार व्यक्त किया।

आईआईटी भिलाई के नेतृत्व वाले इस प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी 8 जून से 13 जून 2026 तक आईआईटी दिल्ली कर रहा है। इस कार्यक्रम के तहत, छात्रों को राजधानी की समृद्ध विरासत, शैक्षिक इकोसिस्टम, शासन व्यवस्था और विकास से जुड़ी उपलब्धियों से परिचित कराया गया।

अपनी यात्रा के दौरान, छात्रों ने दिल्ली के कई प्रमुख संस्थानों, विकास परियोजनाओं और खास जगहों का दौरा किया। इससे उन्हें देश की शासन-प्रणाली, सांस्कृतिक विरासत और शहरी विकास की पहलों को करीब से जानने का मौका मिला। इन दौरों से उन्हें डिजिटल शासन, जन-सेवा वितरण, संवहनीय विकास और राष्ट्रीय संस्थानों के कामकाज के बारे में जानकारी मिली, साथ ही उन्हें भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और सामाजिक-आर्थिक प्रगति की व्यापक समझ भी हुई।

इस यात्रा का मकसद ‘युवा संगम’ के पांच स्तंभों—पर्यटन, परंपराओं, विकास, तकनीक और लोगों के बीच आपसी जुड़ाव के तहत बेहतरीन अनुभव प्रदान करना है। यह कार्यक्रम युवाओं के बीच आपसी सम्मान, सांस्कृतिक समझ और भावनात्मक एकता को बढ़ावा देने के साथ-साथ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करता है।

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