
‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ की डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी परियोजना में उत्कृष्ट योगदान पर राष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त किया तृतीय स्थान, छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता सेनानी एवं सांस्कृतिक विरासत को मिली नई पहचान
केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने किया सम्मान।

जब देश अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तब यह अवसर केवल आज़ादी के उत्सव का नहीं, बल्कि उन हजारों गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण करने का भी है, जिनके त्याग और बलिदान ने भारत की स्वतंत्रता की नींव रखी। इन्हीं अनसुने नायकों की गाथाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी (DDR) परियोजना एक ऐतिहासिक पहल बनकर उभरी है।
इस राष्ट्रीय परियोजना में उत्कृष्ट शोध, दस्तावेजीकरण एवं ऐतिहासिक धरोहर के डिजिटल संरक्षण के लिए दुर्ग जिले के CCRT प्रशिक्षित शिक्षक श्री पंकज सिंह राजपूत को संस्कृति मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। परियोजना के राष्ट्रीय मूल्यांकन में उनके कार्य को देशभर में तृतीय स्थान प्राप्त हुआ, जो छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण उपलब्धि है।
स्वतंत्रता की अमृत गाथाओं को मिला डिजिटल स्वरूप
प्रधानमंत्री की प्रेरणा से प्रारंभ “आज़ादी का अमृत महोत्सव” के अंतर्गत वर्ष 2021 में शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक घटनाओं, सांस्कृतिक धरोहरों, लोक परंपराओं और स्थानीय इतिहास का वैज्ञानिक शोध एवं डिजिटल संरक्षण करना था।

देशभर के CCRT प्रशिक्षित शिक्षकों और जिला स्रोत व्यक्तियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में वर्षों तक शोध कर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी प्रामाणिक जानकारियों का संकलन किया। इन अभिलेखों का विशेषज्ञों द्वारा सत्यापन कर संस्कृति मंत्रालय के आधिकारिक डिजिटल पोर्टल पर संरक्षित किया गया, जिससे भारत के स्थानीय इतिहास को राष्ट्रीय पहचान मिली।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय मंच
छत्तीसगढ़ की धरती स्वतंत्रता आंदोलन, जनजातीय संघर्ष, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से समृद्ध रही है। इस परियोजना के माध्यम से राज्य के अनेक गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल अभिलेख का हिस्सा बनाया गया।
यह पहल केवल इतिहास संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई है।
पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि
राष्ट्रीय सम्मान समारोह की विशेष उपलब्धि यह रही कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य से चयनित तीनों शिक्षक दुर्ग जिले से थे। छत्तीसगढ़ से तीनों शिक्षक दुर्ग जिले के जिसमें पंकज सिंह राजपूत शासकीय प्रोन्नत प्राथमिक शाला टिकरापारा खुरसुल, टिकेश्वर प्रसाद गजपाल शासकीय हाई स्कूल आगेसरा, राघवेन्द्र कुमार ध्रुव शासकीय प्राथमिक शाला उमरपोटी है।
परियोजना के राष्ट्रीय मूल्यांकन में देशभर में तृतीय स्थान प्राप्त होना राज्य के शिक्षकों की शोध क्षमता, कार्य गुणवत्ता और ऐतिहासिक चेतना का प्रमाण है।
यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संस्कृति मंत्रालय, CCRT, शिक्षकों, शोधकर्ताओं, स्थानीय इतिहासकारों, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों और समाज के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
नई शिक्षा नीति-2020 की भावना को साकार करती पहल
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय ज्ञान परंपरा, स्थानीय इतिहास, अनुभवात्मक अधिगम और समुदाय आधारित शिक्षा पर विशेष बल देती है। डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी परियोजना ने इन उद्देश्यों को व्यवहार में साकार किया है।
इस परियोजना ने यह सिद्ध किया कि शिक्षक केवल कक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के शोधकर्ता, सांस्कृतिक दस्तावेजकर्ता और राष्ट्रीय विरासत के संरक्षक भी हो सकते हैं। स्थानीय इतिहास को विद्यालयी शिक्षा से जोड़कर विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना, संवैधानिक मूल्यों, सांस्कृतिक गौरव और शोध की प्रवृत्ति विकसित की जा सकती है।
1470 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों का हुआ दस्तावेजीकरण
इस राष्ट्रीय परियोजना के अंतर्गत देशभर में लगभग 1470 स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक घटनाओं और संघर्ष गाथाओं का दस्तावेजीकरण किया गया, जिनमें से 1032 से अधिक प्रमाणित प्रविष्टियाँ संस्कृति मंत्रालय के डिजिटल पोर्टल पर संरक्षित की गईं। यह डिजिटल संग्रह आज शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय धरोहर बन चुका है।
नई दिल्ली में मिला राष्ट्रीय सम्मान
DDR परियोजना के समापन अवसर पर नई दिल्ली स्थित सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (CCRT), द्वारका में आयोजित राष्ट्रीय सम्मान समारोह में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA) के अध्यक्ष श्री राम बहादुर राय सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में चयनित शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों, इतिहासकारों, कलाकारों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता ने स्वतंत्रता दिवस की भावना को और अधिक सार्थक बनाया।
गुमनाम नायकों की खोज बनी जीवन का अविस्मरणीय अनुभव
श्री पंकज सिंह राजपूत ने बताया कि इस परियोजना के दौरान गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों की खोज केवल शोध कार्य नहीं, बल्कि एक अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक यात्रा रही। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों से मुलाकात की, पुराने अभिलेखों एवं सरकारी दस्तावेजों का अध्ययन किया, स्थानीय इतिहासकारों और वरिष्ठ नागरिकों से विस्तृत चर्चा की तथा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त तथ्यों का सत्यापन किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में अनेक ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की जानकारी सामने आई जिनके त्याग, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति की गाथाएँ समय के साथ इतिहास के पन्नों में दब गई थीं। उन्हें पुनः राष्ट्रीय पहचान दिलाना उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
कई चुनौतियों के बीच पूरा हुआ शोध
शोध कार्य के दौरान अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर प्रमाणिक अभिलेख उपलब्ध नहीं थे, सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय जनश्रुतियों में अंतर था, पुराने दस्तावेज नष्ट हो चुके थे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मौखिक इतिहास के आधार पर तथ्यों का सत्यापन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद धैर्य, समर्पण और निरंतर शोध के माध्यम से महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्यों का सफलतापूर्वक डिजिटल संरक्षण किया गया।
वर्ष 2021 में संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई डिजिटल डिस्ट्रिक्ट रिपॉजिटरी (DDR) परियोजना का उद्देश्य देश के प्रत्येक जिले में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े गुमनाम एवं प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों, ऐतिहासिक घटनाओं, स्मारकों, सांस्कृतिक धरोहरों और स्थानीय इतिहास का वैज्ञानिक शोध, प्रमाणिक सत्यापन एवं डिजिटल संरक्षण करना था। इस महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना का संचालन संस्कृति मंत्रालय के अधीन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (CCRT), नई दिल्ली द्वारा किया गया।







