Home छत्तीसगढ़ किराना से ट्रैक्टर तक का सफर

किराना से ट्रैक्टर तक का सफर

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नारायणपुर, 12 मार्च 2026// राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी योजना से जुड़कर अबुझमाड़ क्षेत्र के ग्राम कुरूषनार की रहने वाली शांति दुग्गा ने अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाया है और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

शांति दुग्गा वर्ष 19 अगस्त 2019 को रोशनी स्व सहायता समूह से जुड़ीं, प्रतिज्ञा उनके ग्राम संगठन का नाम था। शुरुआत में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। परिवार की आजीविका का मुख्य साधन कृषि, वनोपज संग्रहण और मजदूरी तक ही सीमित था। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत करना शुरू किया। शासन की ओर से समूह को चक्रिय निधि 15 हजार रुपये तथा सामुदायिक निवेश कोष 60 हजार रुपये प्राप्त हुआ, जिससे समूह के सदस्यों के बीच लेन-देन और आर्थिक गतिविधियां शुरू हुईं।

बैंक लिंकेज के माध्यम से शांति दुर्गा ने सबसे पहले 1 लाख रुपये का ऋण लेकर किराना दुकान का व्यवसाय शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 2 लाख 70 हजार रुपये का ऋण लेकर कपड़े का व्यापार शुरू किया। बाजार-हाट के कार्य को सुगम बनाने के लिए उन्होंने एक पिकअप वाहन भी खरीदा, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय होने लगी। आगे चलकर उन्होंने समूह से तीसरे चरण में 6 लाख रुपये का ऋण लेकर ट्रैक्टर खरीदा। इन सभी गतिविधियों के माध्यम से अब उनके परिवार की वार्षिक आय लगभग 4 से 5 लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

शांति दुग्गा का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन की बिहान योजना उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस योजना के कारण उनका परिवार आज खुशहाल जीवन जी रहा है और बच्चों को अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पा रही हैं। शांति दुग्गा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को धन्यवाद ज्ञापित किया है। यह सफलता दर्शाता है कि यदि ग्रामीण महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़कर योजनाओं का लाभ उठाएं, तो वे आर्थिक रूप से सशक्त बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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