दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में पश्चिम एशिया पर अनौपचारिक मंत्री समूह (आईजीओएम) की 5वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में संघर्ष के नवीनतम घटनाक्रमों का जायजा लिया गया और जनता पर इसके न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए भारत की तैयारियों को मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई। इस बैठक में रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी; रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव; संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू; नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू; पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए।

आईजीओएम को सूचित किया गया कि देश सुरक्षित है और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कोई कमी नहीं है, जबकि अधिकांश अन्य देशों ने घरेलू खपत को नाटकीय रूप से कम करने के लिए आपातकालीन उपाय किए हैं। भारत के पास 60 दिनों का कच्चा तेल, 60 दिनों की प्राकृतिक गैस और 45 दिनों का एलपीजी भंडार उपलब्ध है। विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर की मजबूत स्थिति में है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल शोधक और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक देश है, जो 150 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है और घरेलू मांग को पूरी तरह से पूरा कर रहा है। हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें लगातार बहुत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे देश पर भारी भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ईंधन संरक्षण से इस बोझ को कम किया जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनता से वैश्विक आर्थिक व्यवधानों, आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियों और अंतर्राष्ट्रीय संघर्षों से उत्पन्न बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए सामूहिक भागीदारी की अपील की गई है। इसके अंतर्गत पेट्रोलियम उत्पादों के विवेकपूर्ण उपयोग और अनावश्यक खपत में कमी पर बल दिया गया है, ताकि वर्तमान और भविष्य में देश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम किया जा सके।







