Home छत्तीसगढ़ पंचशील नगर में एक घर से मिले अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत सर्प

पंचशील नगर में एक घर से मिले अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत सर्प

11
0

दुर्लभ श्वेतवर्णी करैत सर्प एक अत्यंत दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था वाला जहरीला सांप है, जो हाल ही में छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में देखा गया है। शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण इसका शरीर सफेद या हल्के रंग का नजर आता है।

वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है। दुर्ग वनमंडल के चरौदा क्षेत्र के पंचशील नगर में एक घर से मिले अत्यंत दुर्लभ श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत सर्प का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।

दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वास को प्राथमिकता

यह कार्रवाई वन  एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है। वन विभाग द्वारा दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और उनके सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है।
उल्लेखनीय है कि वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार और वन बल प्रमुख श्री अरुण कुमार पाण्डेय के मार्गदर्शन के अनुरूप राज्य में वन्यजीव संरक्षण एवं संवर्धन के प्रयासों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

दुर्लभ आनुवंशिक विशेषता के कारण सफेद दिखाई देता है करैत

विगत 21 जुलाई को पंचशील नगर में सफेद रंग का सांप होने की सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम और सर्प रेस्क्यूअर विजय शर्मा मौके पर पहुंचे। सांप का सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद इसकी पहचान श्वेतवर्णी (Leucistic) करैत (Bungarus fasciatus) के रूप में हुई। श्वेतवर्णता एक दुर्लभ आनुवंशिक अवस्था है, जिसमें शरीर में रंगद्रव्य (मेलानिन) की कमी के कारण जीव का रंग सामान्य से अलग दिखाई देता है। इसी कारण यह करैत सामान्य करैत की तुलना में सफेद रंग का दिखाई देता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार के दुर्लभ करैत का पाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ घटना है।

दक्षिण एशिया में भी बहुत कम दर्ज हुए हैं ऐसे मामले

श्वेतवर्णी करैत के मिलने की घटनाएं दक्षिण एशिया में बहुत कम दर्ज की गई हैं। भारत में महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कुछ चुनिंदा स्थानों से ही इसके मिलने के अभिलेख उपलब्ध हैं। ऐसे में दुर्ग जिले में इस दुर्लभ करैत का मिलना क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव संपदा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ा गया

सर्प विशेषज्ञों से जांच के बाद करैत के श्वेतवर्णी होने की पुष्टि की गई। इसके बाद दुर्ग वनमंडलाधिकारी श्री दिपेश कपिल के निर्देश पर 23 जुलाई 2026 को दुर्ग आर.ए. के श्री प्रमोद यादव, सर्प मित्र श्री विजय शर्मा और सर्प विशेषज्ञ श्री अविनाश मौर्य ने इसे राजनांदगांव वनमंडल के अंतर्गत कक्ष क्रमांक आर.एफ. 549 स्थित प्राकृतिक पर्यावास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया।
वन विभाग का यह कदम वन्यजीवों के संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवास की सुरक्षा और जैव विविधता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here